महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर क्या है?
ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसमें महिलाओं के स्तन ऊतकों (breast tissues) में असामान्य कोशिकाएँ (abnormal cells) तेज़ी से बढ़ने लगती हैं। ये कोशिकाएँ एक गांठ या ट्यूमर के रूप में विकसित हो सकती हैं, जो समय रहते इलाज न मिलने पर शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं।
महिलाओं में यह कैंसर सबसे आम प्रकारों में से एक है, और इसकी शुरुआती पहचान (early detection) जीवन बचाने में बेहद मददगार होती है। नियमित जांच और जागरूकता इसके खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है।
🔹 ब्रेस्ट कैंसर के मुख्य प्रकार
ब्रेस्ट कैंसर कई प्रकार का होता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर की शुरुआत स्तन के किस हिस्से में हुई है। प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:
- डक्टल कार्सिनोमा इन साइटू (DCIS) – यह शुरुआती अवस्था का कैंसर है जो दूध की नलियों (milk ducts) में सीमित रहता है।
- इनवेसिव डक्टल कार्सिनोमा (IDC) – यह सबसे सामान्य प्रकार है, जो नलियों से बाहर निकलकर आसपास के ऊतकों में फैल जाता है।
- इनवेसिव लोब्यूलर कार्सिनोमा (ILC) – यह कैंसर स्तन के दूध बनाने वाले हिस्से (lobules) से शुरू होता है और धीरे-धीरे फैलता है।
- ट्रिपल नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर – यह एक आक्रामक (aggressive) प्रकार है जिसमें तीनों प्रमुख हार्मोन रिसेप्टर (ER, PR, HER2) नहीं पाए जाते।
- इंफ्लेमेटरी ब्रेस्ट कैंसर – यह दुर्लभ लेकिन तेज़ी से बढ़ने वाला कैंसर है, जिसमें स्तन की त्वचा लाल और सूजी हुई दिखाई देती है।
💗 ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण (Symptoms of Breast Cancer)
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती चरण में अक्सर कोई दर्द या स्पष्ट संकेत नहीं दिखते, इसलिए जागरूक रहना बहुत ज़रूरी है। नीचे दिए गए कुछ आम लक्षण (Symptoms) हैं, जिन पर ध्यान देना चाहिए
- स्तन में गांठ या कठोर हिस्सा महसूस होना – यह ब्रेस्ट कैंसर का सबसे आम संकेत है।
- स्तन के आकार या आकार में बदलाव – एक स्तन का आकार अचानक बदलना या असमान दिखना।
- निप्पल से असामान्य स्राव (discharge) – जैसे खून या दूध जैसा तरल निकलना।
- स्तन की त्वचा में गड्ढे या सिकुड़न आना – त्वचा का सतह बदल जाना।
- निप्पल का अंदर की ओर मुड़ जाना (inverted nipple)
- स्तन या बगल (armpit) में सूजन या दर्द होना।
- त्वचा का लाल या मोटा पड़ जाना, जो जलन जैसा दिख सकता है।
👉 यदि इन लक्षणों में से कोई भी लंबे समय तक बना रहता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती पहचान से इलाज के परिणाम बेहतर होते हैं।
🔹 ब्रेस्ट कैंसर के कारण (Causes of Breast Cancer)
ब्रेस्ट कैंसर के सटीक कारणों का पता पूरी तरह नहीं चल पाया है, लेकिन कई कारक ऐसे हैं जो इसके खतरे को बढ़ा सकते हैं
- आनुवांशिक कारण (Genetic Factors) – परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर होने पर जोखिम बढ़ जाता है।
- हार्मोनल बदलाव (Hormonal Changes) – एस्ट्रोजेन (Estrogen) हार्मोन का अधिक स्तर कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को बढ़ा सकता है।
- उम्र (Age) – उम्र बढ़ने के साथ ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी बढ़ता है।
- मोटापा और असंतुलित आहार (Obesity and Poor Diet) – वसा (fat) और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन खतरा बढ़ाता है।
- शराब और धूम्रपान (Alcohol & Smoking) – ये शरीर में हार्मोनल असंतुलन और कोशिकाओं में नुकसान का कारण बनते हैं।
- पहली बार देर से गर्भधारण या बच्चे को दूध न पिलाना।
- रेडिएशन के संपर्क में आना (Exposure to Radiation) – लंबे समय तक विकिरण के संपर्क में रहना भी एक कारण हो सकता है।
👉 इन कारणों से बचाव और नियमित जांच से ब्रेस्ट कैंसर की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
शुरुआती चरण में स्तन में गांठ महसूस होना, आकार में बदलाव, निप्पल से असामान्य स्राव या त्वचा में सिकुड़न जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इन संकेतों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
क्या ब्रेस्ट कैंसर केवल महिलाओं को होता है?
नहीं, ब्रेस्ट कैंसर पुरुषों में भी हो सकता है, लेकिन इसका प्रतिशत बहुत कम होता है। महिलाओं में यह बीमारी अधिक आम है।
क्या ब्रेस्ट कैंसर का इलाज संभव है?
हाँ, अगर ब्रेस्ट कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो इसका इलाज पूरी तरह संभव है। सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन और हार्मोन थेरेपी जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं।
ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए क्या उपाय अपनाए जा सकते हैं?
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब से परहेज, और समय-समय पर ब्रेस्ट की जांच करवाना ब्रेस्ट कैंसर से बचाव में मदद कर सकते हैं।
ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम कारक (Risk Factors for Breast Cancer)
हर महिला में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा समान नहीं होता। कुछ विशेष कारण या जोखिम कारक (Risk Factors) ऐसे होते हैं जो इस बीमारी की संभावना को बढ़ा देते हैं। आइए जानते हैं कौन से हैं वो मुख्य कारक
- आयु (Age) – 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक होता है।
- पारिवारिक इतिहास (Family History) – अगर मां, बहन या दादी को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है, तो इसका खतरा बढ़ सकता है।
- अनुवांशिक जीन (Genetic Mutations) – BRCA1 और BRCA2 जैसे जीन में बदलाव (mutation) ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बढ़ाते हैं।
- हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance) – एस्ट्रोजेन हार्मोन का लंबे समय तक अधिक स्तर बने रहना एक प्रमुख कारण है।
- पहले मासिक धर्म और देर से रजोनिवृत्ति (Early Menstruation & Late Menopause) – लंबे समय तक मासिक चक्र चलने से हार्मोनल प्रभाव बढ़ जाता है।
- पहली बार देर से गर्भधारण (Late Pregnancy) – 30 वर्ष की उम्र के बाद पहली बार गर्भधारण करने पर खतरा थोड़ा बढ़ जाता है।
- स्तनपान न कराना (Not Breastfeeding) – बच्चे को स्तनपान न कराने से भी जोखिम बढ़ सकता है।
- मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली (Obesity & Inactive Lifestyle) – अधिक वजन और व्यायाम की कमी हार्मोन स्तर को प्रभावित करते हैं।
- शराब और धूम्रपान (Alcohol & Smoking) – ये शरीर में कैंसरकारी रासायनिक बदलाव पैदा करते हैं।
- रेडिएशन एक्सपोजर (Radiation Exposure) – पहले किसी अन्य रोग के इलाज में रेडिएशन लेने वाली महिलाओं में जोखिम थोड़ा अधिक होता है।
👉 इन जोखिम कारकों के बारे में जागरूक रहना और नियमित ब्रेस्ट जांच करवाना, ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान में बहुत मददगार साबित हो सकता है।